नवोदय परिणाम 2026 आ चुका है और इस वक्त हर घर में एक अलग माहौल है। कहीं खुशियाँ हैं, कहीं थोड़ी उदासी — लेकिन इस पल में सबसे अहम भूमिका किसी की है तो वो है अभिभावकों की। बच्चा परीक्षा देता है, लेकिन उसके पीछे की ताकत माँ-बाप होते हैं। और परिणाम के बाद भी यही ताकत सबसे ज्यादा काम आती है।
इसलिए यह खबर सिर्फ छात्रों के लिए नहीं — हर उस माँ-बाप के लिए है जिनका बच्चा इस परीक्षा में बैठा था।
चयन हुआ है तो अभिभावक यह करें
बच्चे का नाम चयन सूची में आ गया है तो बधाई — लेकिन अब जिम्मेदारी और बढ़ गई है। सबसे पहले परिणाम का प्रिंटआउट निकालें और सुरक्षित रखें। इसके बाद दस्तावेज जुटाना शुरू करें — जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति और आय प्रमाण पत्र तथा पिछले स्कूल के सभी कागजात।
दस्तावेज सत्यापन की तारीख कभी भी आ सकती है। जो अभिभावक पहले से तैयार होंगे उनके बच्चों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
नवोदय जीवन के लिए बच्चे को कैसे तैयार करें
नवोदय में प्रवेश के बाद बच्चा पहली बार घर से दूर हॉस्टल में रहेगा। यह बदलाव छोटे बच्चों के लिए भावनात्मक रूप से कठिन हो सकता है। अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चे को इस बदलाव के लिए मानसिक रूप से तैयार करें।
उन्हें बताएं कि अनुशासन और नई दिनचर्या शुरुआत में कठिन लगती है लेकिन धीरे-धीरे सब सामान्य हो जाता है। घर की याद आएगी — यह स्वाभाविक है। लेकिन यही माहौल उन्हें एक मजबूत इंसान बनाएगा।
चयन नहीं हुआ तो बच्चे को क्या कहें
यह वो पल है जहाँ अभिभावकों की भूमिका सबसे नाजुक हो जाती है। बच्चे को डाँटें नहीं, किसी से तुलना न करें और निराशा का बोझ उस पर न डालें। उसे महसूस कराएं कि आपकी नजर में वो पहले भी खास था और आज भी है।
एक परीक्षा का परिणाम बच्चे की काबिलियत नहीं तय करता — यह बात बच्चे से ज्यादा अभिभावकों को समझनी जरूरी है।
वेटिंग लिस्ट को लेकर अभिभावक रहें सतर्क
अगर बच्चे का नाम वेटिंग लिस्ट में है तो आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in पर नियमित नजर रखें। मुख्य सूची में कोई सीट खाली होने पर वेटिंग से मौका मिलता है और ऐसी सूचना अचानक आती है — इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
आखिरी बात — अभिभावकों के नाम
आपने जो मेहनत की, जो त्याग किया, जो उम्मीदें बच्चे में जगाए रखीं — वो सब बेकार नहीं गया। परिणाम चाहे जो भी हो, आपका बच्चा आपकी वजह से यहाँ तक आया। यही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
